Abhishek

Posted: January 30, 2018 in Uncategorized
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Interesting Traits
1. In 2014 Modi came, They think He become PM to resolve Hindu issues and What are the Hindu issues according to them – Ram Mandir, Article 370, Kashmir Mullah Free, Pakistan Nuked, UCC, Ram Rajya and rest of the matter never exist.

2. Till 2016, They are done with Modi as these great thinkers feel that these small issues should have been done in 2 years time. Modi is now Secular for them Just in 2 Years despite that person gave every second into his service.

3. In 2016 A New Leader these people found for their entertainment and that is Yogi Adityanath. It is just 2018 January and the very same people now putting Yogi too in the same bracket.

These people are so noble that they will remove all these problems in weeks and month.
They never think What is the consequences.

This is not the post to taunt. I just want that Please Don’t Do this. Prepare a plan and Stick to it. Till 2024 No Drama No Congress No Backstabbing Full Unity Full Hindu Unity – Promise me that You will become more learned and Understand the Core. Be Patient. Be Rutheless and Stand With Open Chest with your Leadership.
Right Now Biggest Challenge – Hindu Unity among all Caste. Virtual Abolition Of Caste By Birth. Only One Identity – Sanatan Hindu.
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Prashant

Posted: January 28, 2018 in Uncategorized
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The Nationalist View

Posted: January 28, 2018 in Uncategorized
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भारतीय पकोडा, व अमरीकी निम्बू पानी स्टॉल (American Lemonade stand.): – पोस्ट कॉपी की हुई है, पसंद आए तो आप भी करें ।

1. अमेरिका में एक iconic परम्परा है-छोटे बच्चे अपने घर के सामने निम्बू पानी के स्टॉल लगाते है। पूरा पैसा माता पिता से ऊधार लेते है, पूरा दिन निम्बू पानी बेचते है, व शाम को नफ़े नुक़सान का हिसाब कर माता पिता का पैसा लौटा देते है। सारा काम स्वयं करते है, ये नही कि रामू काका से निम्बू पानी बनवाया व बस साथ में जाकर खड़े हो गए। अधिकतर घरों में बाद में भी माता पिता कॉलेज का ख़र्च नही उठाते वहाँ, ख़ुद रेस्टौरेंट में बर्तन धोओ, वेटरगिरी करो व पढ़ो।

फलस्वरूप सारे अविष्कार अमेरिका में होते है, अमेरिका सबसे धनी है, सबसे ज़्यादा क़िस्से वहाँ है ग़रीबी में पैदा होकर सबसे अमीर बन जाने के।
2. ओद्योगिक क्रांति सबसे पहले इंग्लैंड में आयी। क्यूँ आयी? विज्ञान? विज्ञान तो साथ ही साथ युरोप में भी था। पूरी दुनिया में अंग्रेजो ने राज किया। क्यूँ किया? कोई वीर न थे। भारत में भी ज़्यादातर लड़ाई छल कपट व रिश्वतबाज़ी से जीती उन्होंने।

ओद्योगिक क्रांति व पूरी दुनिया पर उनके छाने का कारण था PRIMOGENITURE याने इस्टेट पर सारा हक पहले बेटे का, बाकी माँ बाप ने लिए मज़े को कोसने के लिए स्वतंत्र रहेंगे ।

जी ! इंग्लैंड में साधारण परिवारों में भी परम्परा थी कि पूरी ज़मीन बड़े बेटे को जाएगी, बाक़ी बेटे सड़क पर, बड़े होते ही। बाहर निकलो, खाओ कमाओ। मरता क्या न करेगा- उद्योग लगाएगा, नाव लेकर समंदर में निकल जाएगा, लड़ेगा, राज करेगा।

हमारे यहाँ तो सात पुश्तो का इंतज़ाम करके जाने की परम्परा है।

3. भारत के कई इलाक़े है जहाँ ज़मीन का मालिक अपने ही खेत में हल चलाने को सबसे बड़ा अपमान मानता है। कल्पना करे-किसान हल चलाने को सबसे बड़ा अपमान मानता है।

और भारत सबसे ग़रीब देश है।

जहाँ हर व्यक्ति श्रम में शर्म देखेगा, तो काम होगा नही, और बिना काम कोई धन पैदा नही हो सकता, कोई समृद्धि पैदा नही हो सकती।

इसीलिए हर आदमी नौकरी के पीछे भागता है यहाँ, ऐसी नौकरी जिसमें काम न करना पड़े। बच्चो को बजाय नींबू पानी बेचना सिखाने के, संटी मार मार कर पढ़ाने में लगे है हम लोग-पढ़ नही तो नौकरी नही मिलेगी। इतना विवश कर दिया है बच्चो को कि एक दूसरे की जान ले रहे है बच्चे, या अपनी जान ले रहे है।

रंगदारी सबसे बड़ा उद्योग बन गया है। कोई व्यवसाय करे भी तो रंगदार पहुँच जाते है हफ़्ता माँगने, क्यूँकि उसमें शान है, पकोड़े बनाने में या हल चलाने में अपमान।

या सरकारी नौकरी मिल जाए तो regulation करके उद्योग धंधे बंद कराओ, पकोड़े वालों की रहड़ी ज़ब्त करो।

4. मोदी ने पकोड़े बनाने से पहले संगठित क्षेत्र में बढ़ती नौकरियों के आँकड़े दिए थे। लेकिन देश ने क्या सुना? पकोड़े बनाने को बोल रहा है मोदी ! हम और पकोड़े बनाएँगे ? PhD की है PhD। PhD कर नगर पालिका के सफ़ाई कर्मचारी का तो फ़ॉर्म भर सकते है लेकिन पकोड़े? बस PhD कर ली, अब हम दुनिया के दामाद हो गए। नौकरी दो हमे। तुम्हारी duty है।

मान अपमान inter-subjective होते है। याने अधिकतर लोग जिसे मान माने वो मान, जिसे अपमान माने वो अपमान।

हमने काम को अपमान मान लिया है। घूसख़ोरी को सम्मान मान लिया है। हर पिता घूसख़ोर दामाद ढूंढ़ता है। बेटी, जिसके हाथ में राष्ट्र का भविष्य है इत्यादि सुनाया जाता है, घूसखोर पति चाहती है । दिखा भविष्य ?

पैसा नामक कोई वस्तु होती ही नही है। पैसा तो एक रसीद है जो हमारे काम या हमारी बनाई वस्तु के बदले में ख़रीददार हमे देता है। हम काम न करे या कुछ वस्तु न बनाए तो कोई पैसा नही हो सकता। जो पैसा हम बचाते है, वह पूँजी है। तो हम काम न करे या कुछ वस्तु न बनाए तो कोई पैसा नही सकता, ना ही पूँजी हो सकती। इसीलिए न हमारे पास पैसा है ना पूँजी है, और हम दुनिया के सबसे ग़रीब देशों में है। क्यूँकि हमने काम को ही अपमान मान लिया है। जैसे हिरन घास खाने को अपमान मान ले या शेर हिरन खाने को अपमान मान ले। दोनो भूखे ही मरेंगे।

(1.अमेरिका में भी नौकरशाही पैर पसार रही है वामियों की वजह से। कई घटनाये हो चुकी है जब पुलिस ने बच्चो से निम्बू पानी बेचने के लाइसेन्स दिखाने की माँग की, या फ़ूड इन्स्पेक्टर ने सैम्पल लेने की धमकी दी।)

2. चीन सीखना चाहता है कि innovation अमेरिका में ही क्यूँ होते है। इसके लिए वो चीनी बच्चो को अमेरिका पढ़ने भेजता है, फिर उन्हें वापिस बुलाता है कि कुछ innovation करके दिखाओ।(जी हमारी तरह क़ानून बना कर वापिस नही बुलाता, बल्कि कहता है अमेरिका से दस प्रतिशत ज़्यादा देंगे, वैसी ही कालोनी बना कर देंगे, वही सुविधाए देंगे।)

ये क़ानून की बीमारी नई लगी है हमें-जहाँ समस्या नज़र आए, क़ानून बना दो। फिर कानून अपने आप में नयी समस्याएँ पैदा कर ही देता है, तब …

तब और क्या ? उनसे निपटने के लिए एक और कानून बना दो ! नियम बनेंगे, तो लोग जितना तोड़ेंगे, घूस उतनी ही अधिक मिलेगी ! क्या मज़े की बात है ना ?
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Ramakaant

Posted: January 23, 2018 in Uncategorized
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व्यक्तिगत रूप से मैं कर्णी सेना द्वारा फ़िल्म पद्मावती के उग्र विरोध के खिलाफ हूँ पर निम्न तथ्य निश्चित रूप से विचारणीय हैं

22 साल की उम्र में अनुराग कश्यप नें एक फिल्म बनायी थी black friday, बंबई बम धमाकों के असल किरदारों पर, बंबई बम धमाके ,जिनके किरदार दाऊद, याकूब और कंपनी थे। इसे ग्रांड ज्यूरी प्राईज दिया गया Indian film festival of los Angels द्वारा।

कहते हैं कि हुसैन जैदी (जो कि खुद मुस्लिम हैं) ने तीन साल दिन रात एक कर के इस सारे प्रकरण पर रिसर्च करी थी।

पर हाय, फिल्म पर बांबे हाईकोर्ट द्वारा 2004 में प्रतिबंध लगाया गया, कारण?

एक समुदाय की भावनाओं को ठेस।
आतंकवादीयो को आतंकवादी कहना भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, क्यों??
कारण एक ही है, कुछ लोग मानते थे उन्होंने सबाब का काम करा, खैर…

टॉम हैंक्स के पूरे फिल्मी करियर में दो फिल्में सबसे यादगार हैं, उनके बेमिसाल अभिनय की प्रतिमा।
सेविंग प्राइवेट रेयान और द विंची कोड.

2006 में आयी दूसरी फिल्म द विंची कोड पर भारत के चार राज्यों नागालैंड, पंजाब, तमिलनाडु और गोवा में बैंन लगा दिया गया।
कारण यह पिक्चर ईसाई(कैथोलिक समाज) की भावनाओं को ठेस पंहुचाती है।

ये तो आधिकारिक बैन था, सरकार ने पायरेटेड सीडी भी ब्लाक कर दी थी,
मुझे याद है मैं तब फिल्म की एक पायरेटेड सीडी ढूंढने में पूरा साल लग गया था।

एक फिल्म बनी थी 2005 में Sins, बैन कर दी गयी। कारण कहानी एक इसाई(Preast) पादरी द्वारा महिलाओं का शोषण दिखाया गया था।

इस से भी भावनाओं को काफी ठेस पहुंची।

आप कभी गूगल पर सर्च करना, best song of kishore kumar और हर एक juke box में एक गाना जरूर आपको मिलेगा,,

“तेरे बिना जिंदगी से कोई, शिकवा, तो नंही”
संजीव कुमार और किशोर दा के कैरियर की माईलस्टोन मूवी को कांग्रेस सरकार द्वारा बैन कर दिया था।

ये गाना निर्धारित तिथि से 26 हफ्ते यानी 182 दिन बाद सुना लोगों ने,, पूरे 182 दिन बाद।

कारण इस पिक्चर को कांग्रेस को ठेस देने वाला बताया गया था।

याद है 2013 में आयी पिक्चर “विश्वरूपम”
ये मामला थोडा सा अलग है, कोर्ट और सेंसर बोर्ड ने रिलीज की अनुमति दे दी थी।
पर जयललिता सरकार ने इसे मुस्लिम विरोधी मानते हुए तमिलनाडु में बैन कर दिया था।

कहानी का खैर भारत से कुछ लेना देना नहीं था, अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा पीडित लोगो की कहानी ने तमिलनाडु के लोगो को बहुत ठेस पंहुचायी।

कहते हैं इस फिल्म को बनाने में मशहूर अभिनेता कमल हसन ने अपना घर तक गिरवी रखा था।
मूल फिल्म चूंकि तमिल में थी, तो भावनाओं को दुखाने की महंगी कीमत चुकानी पड़ी।

कमल हासन तो तब सार्वजनिक रुप से भारत छोडने तक की घोषणा कर चुके थे।

तस्लीमा नसरीन पर आज भी बांग्लादेश में बैन है।
कारण उन्होंने बांग्लादेश में मुसलमानों द्वारा हिंदुओं के शोषण होने पर एक किताब लिखी थी “लज्जा”.. तस्लीमा नसरीन पर आज भी बंगाल में प्रवेश करने पर पाबंदी है

The Stanic Verse (शैतानी आयतें),,

भारतीय मूल के बिट्रिश लेखक सलमान रुश्दी की इस किताब ने दुनिया भर में हंगामा मचाया।

इस किताब को इस्लाम बिरोधी मानते हुए तत्कालीन राजीव गांधी की कांग्रेस सरकार ने इस किताब को सम्पूर्ण भारत में प्रतिबंधित कर दिया।

यहां तक कि इस किताब का जापानी में अनुवाद करने वाले लेखक ‘होतरसी ईरागसी’ की हत्या कर दी गयी।

इस किताब के ईतावली ट्रांसलेटर और नार्वे के प्रकाशक पर भी जानलेवा हमले हुए।

तो अगर आपको पद्मावत पिक्चर बैन पर बुरा सा कुछ लग रहा है तो यकीन मानिए,
बुरा तो आपको तब भी बहुत मानना चाहिए था, जब उपरोक्त घटनाएं हुईं थीं

सिर्फ आज ही क्यों ?

एक और बात!
वर्षों से हिंदी फिल्मों में एक trend चल रहा है कि गाँव के पुजारी और बनिये को धूर्त और बदमाश दिखाना, और मौलवी एवं पादरी को सहृदय और अत्यंत दयावान ।ऐसा एक विशेष विचारधारा से प्रभावित लोंगों द्वारा किया जाता रहा और हम सभी हिन्दू अपने liberal attitude के कारण उसे नज़रंदाज़ करते रहे या कुछ हद तक enjoy भी करते रहे।हमारा यही attitude भंसाली,आमिर खान जैसे लोगों को सिर्फ हिन्दू धर्म की आस्था पर चोट करने को प्रेरित करता रहा।
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This post is just a bunch of pictures I took during a short trip to Keoldeo National Park, Bharatpur. Most people just call it Bharatpur bird sanctuary. It is not a big place but apparently it had a lot of wildlife including leopards which have disappeared from the park. British and their slave rajas did a lot to kill a too much of wildlife. [ 159 more words ]

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जिन बच्चो के भविष्य के लिए धन कमाते हो ,मकान बनाते हो, कभी सोचा आपने 30 साल बाद आपकी बचायी हुयी संपती लेने केलिए वे बच्चे नहीं रहेगे। आबादी बढ़ते ही मुस्लिम राष्ट्र हो जायेगा। ऐसा हो चूका है…और अभी भी जारी है >>>- एक दिन पूरे काबूल (अफगानिस्तान) का व्यापार सिक्खों का था, आज उस पर तालिबानों का कब्ज़ा है। सत्तर साल पहले पूरा सिंध सिंधियों का था, आज उनकी पूरी धन संपत्ति पर पाकिस्तानियों का कब्ज़ा है।

एक दिन पूरा कश्मीर धन धान्य और एश्वर्य से पूर्ण पण्डितों का था, तुम्हारे उन महलों और झीलों पर आतंक का कब्ज़ा हो गया और तुम्हे मिला दिल्ली में दस बाय दस का टेंट। एक दिन वो था जब ढाका का हिंदू बंगाली पूरी दुनियाँ में जूट का सबसे बड़ा कारोबारी था | आज उसके पास सुतली बम भी नहीं बचा।- ननकाना साहब, लवकुश का लाहोर, दाहिर का सिंध, चाणक्य का तक्षशिला, ढाकेश्वरी माता का मंदिर देखते ही देखते सब पराये हो गए | पाँच नदियों से बने पंजाब में अब केवल दो ही नदियाँ बची |

यह सब किसलिए हुआ ? केवल और केवल असंगठित होने के कारण ..| इस देश के मूल समाज की सारी समस्याओं की जड़ ही संगठन का अभाव है |- आज भी इतना आसन्न संकट देखकर भी बहुतेरा समाज गर्राया हुआ है | कोई व्यापारी असम के चाय के बागान अपना समझ रहा है, कोई आंध्र की खदानें अपनी मान रहा है | तो कोई सोच रहा है ये हीरे का व्यापार सदा सर्वदा उसी का रहेगा | कभी कश्मीर की केसर की क्यारियों के बारे में भी हिंदू यही सोचा करता था |- तू अपने घर भरता रहा और पूर्वांचल का लगभग पचहत्तर प्रतिशत जनजाति समाज विधर्मी हो गया | बहुत कमाया तूने बस्तर के जंगलों से…आज वहाँ घुस भी नहीं सकता |

आज भी आधे से ज्यादा समाज को तो ये भी समझ नहीं कि उस पर संकट क्या आने वाला है | बचे हुए समाज में से बहुत सा अपने आप को सेकुलर मानता है | कुछ समाज लाल गुलामों का मानसिक गुलाम बनकर अपने ही समाज के खिलाफ कहीं बम बंदूकें, कहीं तलवार तो कहीं कलम लेकर विधर्मियों से ज्यादा हानि पहुंचाने में जुटा है | ऐसे में पाँच से लेकर दस प्रतिशत समाज ही बचता है जो अपने धर्म और राष्ट्र के प्रति संवेदनशील है | धूर्त सेकुलरों ने उसे असहिष्णु और साम्प्रदायिक करार दे दिया |

इसलिए आजादी के बाद एक बार फिर हिंदू समाज दोराहे पर खड़ा है | एक रास्ता है, शुतुरमुर्ग की तरह आसन्न संकट को अनदेखा कर रेत में गर्दन गाड़ लेना तथा दूसरा तमाम संकटों को भांपकर सारे मतभेद भुलाकर संगठित हो संघर्ष कर अपनी धरती और संस्कृति बचाना |
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कामेश्वर

Posted: January 13, 2018 in Uncategorized
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जस्टिस चमलेश्वर और CJI मिश्रा के बीच की प्रतिद्वंदता हर कोर्ट का जानकार रखता है।

आज जो टशन बाहर आई उसका आधार वो 46 मेडिकल कॉलेज थे जिनको फर्जी तरीके से मान्यता दी गयी और इस माममें में सुप्रीम कोर्ट के कुछ जस्टिस की दखलंदाजी भी मानी जाती है। बाकायदा उड़ीसा के एक पूर्व जज को भी गिरफ्तार कर दिया गया था।

अब इसके पीछे क्या खेल हो रहा है। वो समझें-

दरअसल जस्टिस चमेलश्वर की हैसियत सुप्रीम कोर्ट में नम्बर 2 है जस्टिस मिश्रा के बाद। अब कॉलेजियम के अनुसार चीफ जस्टिस के नियंत्रण में कुल 5 जस्टिस अगला चीफ जस्टिस नियुक्त करते हैं, तो जस्टिस चमलेश्वर को अपना पत्ता कटता नजर आ रहा है। इसीलिए वो मीडिया में आकर लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं, और जस्टिस मिश्रा पर मनमानी का आरोप लगा रहे हैं। मगर बात इतनी भी नही है।

जिस मेडिकल फर्जीवाड़े का केस जस्टिस मिश्रा ने पलटा, दरअसल उसके पीछे कई षड्यंत्र है। इस केस को प्रशांत भूषण देख रहा है। इस प्रशांत भीषण ने चुपचाप जस्टिस चमलेश्वर के पास जाके इस केस को अपने पसंदीदा जजों की बेंच पे भिजवा दिया। अब चूंकि ये मेंशनिंग का अधिकार सिर्फ चीफ जस्टिस का होता है तो मिश्रा ने इसे पलट दिया। इस पर भूषण चिल्लाता हुआ मिश्र के कोर्ट में जब पहुंचा तो वहां पहले से ही बार कौंसिल मौजूद थी। भूषण ने इतनी बदतमीजी की कि बार काँसिल के सचिव ने भूषण का लाइसेंस रद्द करने की मांग कर दी।

इस पर जस्टिस मिश्र को कहना पड़ा कि यहां पहले तुम जैसे वकील ही केस के जज तय करते थे? इसलिए अब भी करना चाह रहे हो?

हालांकि बात यहाँ भी खत्म नही होती। जस्टिस मिश्र ही वो हैं जिन्होंने याकूब मेनन पर अंतिम फैसला दे उसे फांसी लगवाई। तब ये भूषण, ग्रोवर, सिब्बल आदि कई NGO के साथ उसकी माफी मांग रहे थे। यहां तक कि कई जज भी। ये लोग तब देर रात को पहुंच गए थे और वहां अपनी बेजत्ती करवा आये। तब से जस्टिस मिश्रा इन्हें खटक रहे हैं।

इसके अलावा अब राम मंदिर का केस भी फाइनल होने वाला है जो जस्टिस मिश्र के अधीन होगा, जिस पर इन लोगों का पूरा जोर है कि ये इस जस्टिस के रहते पूरा ना हो बल्कि इनके किसी चहेते के अधीन आये, ताकि ये उसे पहले तो अपने पक्ष, नहीं तो कम से कम अगले लोकसभा के बाद खींच पाएं। इस मामले में भी धवन और सिब्बल जस्टिस मिश्र को कोर्ट में ही धमकी दे आये थे और बेंच के जज की संख्या भी ज्यादा चाहते थे, जिसे जस्टिस मिश्रा ने मना कर दिया था।

इसके अलावा जिन राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक है, वो केस भी मिश्रा की अदालत में चल रहा है जिस पर पूरी उम्मीद है कि वहां हिन्दू को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलेगा।

इसके अलावा चिंदम्बरम का मैक्सिस केस भी जस्टिस के पास है जिसपर नियमित सुनवाई चलेगी। ट्रिपल तलाक़ पर मुह की खाये ये कांग्रेस पोषित गिरोह जानते है कि उपरोक्त केस में इनका क्या होगा और फिर आगे इनकी राजनीति का क्या होगा।

जस्टिस लोया के नाम पर बहाना भी ये जस्टिस जो बना रहे है, उसका आधार भी अमित शाह को घेरना था, जिसमे कांग्रेसी मीडिया ने इनका साथ दिया और अब भी मीडिया पूरा इनके पक्ष में माहौल बनाएगी ताकि मिश्रा के आगे के जजमेंट को प्रभावित किया जा सके।

ये कांग्रेस द्वारा पहली बार नही है। पिछले कितने जजों के उदाहरण है जिन्होंने कांग्रेस के भले के लिए काम किया और फिर मलाई खाई। उनपर लिखने में ये पहले से बड़ी पोस्ट पूरी किताब बन जाएगी।

बाकी जब हम कहते है इस देश का हर मुद्दा मोदी बनाम कांग्रेस(और उसका गिरोह) है तो यूँही नही कहते। हम पीठ पीछे की बाते जानते हैं। हम तुम्हारी तरह सिर्फ आगबबूला होने वाले फेसबुकिये नही हैं।

अगर यहां तक पूरा पढ़ा तो बहुत बहुत धन्यवाद।

कुमार सुधांशु चौबे उदासी से साभार।
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